लेख/आलेख.
घुमक्कड़ो के यात्रा संस्मरण

घुमक्कड़ी दिल से का रांसी -चोपता अनूठा मिलन

रांसी -चोपता मिलन

माह नबम्बर वर्ष 2017  में  "घुमक्कड़ी दिल ♥ से " व्हाट्सअप ग्रुप का सालाना मिलन समारोह उतराखंड के गढ़वाल भाग में स्थित "रांसी  और चोपता" में आयोजित किया गया । ये महामिलन देश के विभिन्न राज्यों से आये घुमक्कड़ बन्धूओ के सामूहिक प्रयासों से सफल हो पाया । चलिए आप सभी के सम्मुख प्रस्तुत है इस महामिलन के बारे में कुछ संक्षेप में वर्णन -



इस महामिलन में ग्रुप के अधिकतर सदस्यों ( जो देश के विभिन्न राज्यों के विभिन्न शहरों से आये ) ने भाग लिया । इस कार्यक्रम की शुरुआत हरिद्वार से हुई जहाँ पर सभी लोग एक जगह एक होटल में एकत्रित हुए । नाश्ता, चाय के बाद वहां से बस के द्वारा हरिद्वार से ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और उखीमठ के रास्ते रात के नौ बजे रांसी पहुंचे । रात्रि विश्राम और भोजन पानी वहां के एक हिमालयन नाम के होटल में किया गया । रांसी उत्तराखंड के गढ़वाल भाग का एक ग्रामीण स्थल है जो समुन्द्र तल से  करीब 1940 मीटर की उंचाई पर स्थित है । रांसी पंचकेदार में एक मध्यमहेश्वर यात्रा ट्रेक का एक आधार स्थल है । 

अगले दिन रांसी की कुलदेवी माँ राकेश्वरी देवी के दर्शन करने और नाश्ते के उपरांत एक मेडिकल कैम्प रांसी के वासियों के लिए आयोजित किया गया । कैम्प के साथ ही वहां के स्थानीय निवासियों में रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत कर गढ़वाल की पारम्परिक नृत्य और गीतों से हम लोगो का परिचय करवाया । ग्रुप के कुछ लोगो ने भी इस कार्यक्रम में बढ़चढ़ हिस्सा लिया ।  इसी कार्यक्रम में ग्रुप के लोगो को विशेष कार्य के लिए पुरस्कार वहां के विधायक जी के द्वारा वितरित किये गये और एक पुस्तक "पग-पग सनीचर" का विमोचन भी विधायक जी के द्वारा किया गया । विधायक जी के द्वारा घुमक्कड़ी दिल से के इस समाज सेवी कार्य की बहुत सराहना की और ग्रुप के सभी सदस्यों का सम्मान किया और ग्रुप के कार्यो और उद्देश्य की प्रशंशा की । कार्यक्रम के उपरांत दोपहर भोज का आयोजन हिमालयन होटल में ही किया गया । भोजन के उपरांत रांसी का प्रसिद्ध बुग्याल ("सनियारा बुग्याल" जो समुद्रतल 2750 मीटर उंचाई पर स्थित है)  का ट्रेक प्रारम्भ किया गया ।

सनीयारा बुग्याल का ट्रैक बहुत ही उबड़ खाबड़ था । जो कि मां राकेश्वरीश्वरी देवी मंदिर से करीब 5 किलोमीटर का ट्रैक है । कुछ लोग ट्रैक के आधे रास्ते से ही वापस आ गए तो कुछ लोग वही बीच में होम स्टे में रुक गए अधिकतर लोग बुग्याल तक पहुंचने में कामयाब हो गए । हम लोग रात के करीब 8:00 बजे तक सनीयारा बुग्याल पर पहुंच गए थे, पर रास्ते ने बहुत थका दिया था और ऊपर से ठंडी हवा परेशानी बढ़ा रही थी । रात को बुग्याल पर ही खाना पीने की व्यवस्था स्थानीय लोगों और पोर्टरो के द्वारा की गई थी और टेंटों की व्यवस्था वहीं पर की गई थी । टैंट में ही स्लीपिंग बैग का भी प्रबन्ध किया गया था । रात के बुग्याल का मौसम बहुत ही ठंडा था । सुबह की वेला में बुग्याल का नजारा बहुत ही खूबसूरत था सूर्योदय के समय चौखंबा पर्वत भी उस पर पड़ती सूर्य की रोशनी से बहुत ही खूबसूरत नजर आ रहा था । कुछ देर बाद हम लोगों ने वहां से वापसी प्रारंभ की और दोपहर के 11:00 बजे तक रांसी पहुंच गए ।

रांसी में नाश्ता करने के बाद हम लोग बस के द्वारा उखीमठ के रास्ते चोपता पहुँच गए । चोपता "तुंगनाथ मंदिर ट्रेक" का आधार स्थल है जो की समुद्र तल से करीब 2750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है । चोपता में चारो तरफ प्राकृतिक खूबसूरती का बिखरी हुई थी दूर से ही बर्फ से ढकी पर्वतों की श्रंखला नजर आ रही थी । चौखंबा, सुमेरु आदि पर्वत श्रंखलायें चोपता से बहुत सुंदर दिख रही थी । तुंगनाथ जी का मंदिर यहां से करीब 3.50 किलोमीटर ट्रैक करने के बाद था अतः हमने शाम के समय ट्रैक करना उचित नहीं समझा चोपता में ही एक छोटे से बुग्याल पर टेंट लगा दिए गए और एक होटल में कमरा भी ले लिया और हम लोगों ने निर्णय लिया कि रात के 3:00 बजे तुंगनाथ जी के लिए पढ़ाई शुरु करेंगे । रात को खाने में दाल चावल बनाए गए खाना खाकर सभी लोग सोने चले गए ।  

रात के करीब 3:30 बजे कुछ लोग तुंगनाथ जाने के लिए तैयार हो गए । करीब 15 लोगो के साथ तुंगनाथ जी का ट्रैक प्रारंभ किया गया, सुबह सूर्योदय से पहले सभी लोग तुंगनाथ जी पहुंच गए और कुछ लोग चंद्रशिला के लिए निकल गए । तुंगनाथ जी भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर है इसकी ऊंचाई समुद्रतल से करीब 3680 मीटर है और चंद्रशिला करीब 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है । तुंगनाथ जी के मंदिर का द्वार बंद था सो  बाहर से ही भगवान को प्रणाम किया और उनकी अर्चना की गयी तब  चंद्रशिला पर भी कुछ लोग जाकर वापस आ गए । उसके बाद सभी लोग 9:30 बजे तक चोपता पहुंच गए वहां से हल्का फुल्का नाश्ता करने के बाद बस के द्वारा वापिस हरिद्वार के लिए चल दिए । रात के करीब 8:00 बजे के आसपास सभी लोग हरिद्वार पहुंच गए वहां से सभी लोग अपनी-अपनी ट्रेन और साधन से अपने शहर को लौट गए । इस तरह से हमारा ये घुमक्कड़ी दिल से का  महामिलन संपन्न हुआ ।  आशा करता हूं आप लोगों को ये लिखे लेख पसंद आया होगा । दिल से धन्यवाद 

प्रस्तुत है इसी समारोह के कुछ चित्र- जो ग्रुप के सदस्यों के द्वारा ही लिए गये है

हरिद्वार 




रांसी (गढ़वाल)







कुछ वीडियो स्थानीय बच्चो के द्वारा दी गयी प्रस्तुतियों का


सनियारा बुग्याल 







चोपता - तुंगनाथ 



इति श्री
" घुमक्कड़ी दिल से , मिलेंगे फिर से "





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Ritesh Gupta Ritesh Gupta Author

6 comments:

  1. घुकक्कड़ी दिल से मिलेंगे फिर से। ये वो हसीन मुलाकात थी सबकी जो पूरी जिंदगी कभी जीडीएस के सदस्य नहीं भूल सकते। जब आभासी दुनिया से निकलकर लोग वास्तविक जिंदगी में एक दूसरे से मिलते हैं तो ठीक वैसे ही आंखों से आंसू टपकते हैं जैसे बरसात में पहाड़ों से झरना। बहुत ही अच्छे से जिया था हमने अपनी जिंदगी के उस चार दिन को। एक पुस्तक होती है जिसमें चार पेजों की एक भूमिका होती हैे। मेरे लिए यह यात्रा भी ठीक वैसे ही रही मेरी संपूर्ण जिंदगी से ये चार दिन मेरी जिंदगी की भूमिका बनी।

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  2. क्या बात है काश मैं भी शामिल होता इस महान मिलन में

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  3. वाह् ,बहुत सुंदर।घुमक्कड़ो की टोली जब साथ हो। तो आनंद ही आनंद।

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  4. puri life na bhulne vala anubhav raha

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  5. आपका आभार 🙏
    मैंने यह मिलन मिस कर दिया था लेकिन आपकी पोस्ट देखकर काफी हद तक आपके साथ होना महसूस किया।

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